रविवार, 21 अगस्त 2016

ग़ज़ल

आ गया इलियास मौजों से बचाने के लिए
मिल गया है रास्ता मंज़िल को पाने के लिए
बादलों से भी शुआ दिख जायेगी खुर्शीद  की
जब दुहाई हो सदा में उस को पाने के लिए
दिल तिरा अब टूटने दूंगा नहीं हरगिज़ कभी
ज़िन्दगी में आ गया वो ये बताने के लिए मैं
बादलों ने मुस्कुरा कर चांदनी से यूं कहा
फ़ासले भी हैं जरूरी पास आने के लिए
दार पर खुद चढ़ गए सच को बचाने के लिए
इक हक़ीक़ी आइना जग को दिखाने के लिए
बस तिरा एहसास है तेरा पता कोई नहीं
ख़ुशबू फ़ैली है तिरी मुझको जलाने के लिए
गीत इक तेरी नज़र ने लिख दिया रुख पर मिरे
गुनगुनाती हूँ इसे खुद को रुलाने के लिए
दिन तिरे यादें तिरी सपने तिरे रातें तिरी
इतनी सौगातें बहुत है दिल सजाने के लिए
सांस बोझल दिल भी अब तो कर्ब से लबरेज़ है
लब थिरकते ही नहीं है मुस्कुराने के लिए
प्रेम को हक़ कौन देगा रूठने का उम्र भर
तू गया तो कौन आएगा मनाने के लिए
Prem Lata Sharma२१/8/२०१६